01निशानी
सदियों तक यह माना जाता था कि पृथ्वी स्थिर है और सूर्य, चंद्रमा तथा ग्रह उसके चारों ओर घूमते हैं। लेकिन 1400 वर्ष पहले क़ुरआन ने कहा कि केवल सूर्य और चंद्रमा ही नहीं, बल्कि पृथ्वी भी एक निर्धारित मार्ग पर चलती है:

02क़ुरआन का अंश · क़ुरआन 39:5
خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ بِالْحَقِّ ۖ يُكَوِّرُ اللَّيْلَ عَلَى النَّهَارِ وَيُكَوِّرُ النَّهَارَ عَلَى اللَّيْلِ ۖ وَسَخَّرَ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ ۖ كُلٌّ يَجْرِي لِأَجَلٍ مُسَمًّى ۗ أَلَا هُوَ الْعَزِيزُ الْغَفَّارُ ٥
[अल्लाह ने] आकाशों और पृथ्वी को सत्य के साथ बनाया। वह रात को दिन पर लपेटता है और दिन को रात पर लपेटता है, और उसने सूर्य और चंद्रमा को वश में किया; सभी पहले से निर्धारित मंज़िल की ओर चलते हैं। क्या वही प्रभुत्वशाली, क्षमाशील नहीं है?
03चिंतन
यहाँ क़ुरआन सभी के चलने की बात कर रहा है: केवल सूर्य और चंद्रमा की नहीं, बल्कि पृथ्वी की भी। अरबी व्याकरण में एकवचन (एक), द्विवचन (दो) और बहुवचन (तीन या अधिक) के बीच अंतर होता है। द्विवचन के लिए "Kulahuma Yajreean كلاهما يجريان" आता है, लेकिन क़ुरआन ने "Kullon yajree كل يجري" कहा, जो बहुवचन (तीन या अधिक) को दर्शाता है। सूर्य और चंद्रमा केवल दो हैं, लेकिन क़ुरआन तीन या अधिक की ओर संकेत कर रहा है; इसलिए क़ुरआन के अनुसार सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी—तीनों चलते हैं।
04वैज्ञानिक प्रमाण
क़ुरआन 86:11
और लौटने वाला आकाश।
١١ وَالسَّمَاءِ ذَاتِ الرَّجْعِ
"Al-rajeh الرَّجْعِ" का अर्थ है उसी स्थान पर लौटना। आज हम जानते हैं कि सभी ग्रह अपनी-अपनी कक्षाओं में उन्हीं स्थानों पर लौटते हैं।
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