01निशानी
क़ुरआन में उल्कापिंड वायुमंडल में जल सकते हैं। संशयवादी दावा करते हैं कि जिसने भी क़ुरआन लिखा उसने गलती की; हवा उल्कापिंडों पर कोई असर नहीं डाल सकती। आज वैज्ञानिक पुष्टि करते हैं कि उल्कापिंड वायुमंडल में जल जाते हैं।

02वैज्ञानिक प्रमाण
पृथ्वी के वायुमंडल से टकराने पर उल्काएँ जल जाती हैं। फिर अंतरिक्ष यान क्यों नहीं जलता?
अंतरिक्ष के निर्वात में चलने वाली उल्का आमतौर पर दसियों हज़ार मील प्रति घंटे की गति से यात्रा करती है। जब उल्का वायुमंडल से टकराती है, तो उसके सामने की हवा अविश्वसनीय रूप से तेज़ी से संपीड़ित होती है। जब कोई गैस संपीड़ित होती है, तो उसका तापमान बढ़ जाता है। इससे उल्का इतनी गर्म हो जाती है कि वह चमकने लगती है। हवा उल्का को तब तक जलाती है जब तक कुछ भी शेष नहीं रहता।
जब वे उल्कापिंड हमारे वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो प्रवेश के समय उत्पन्न गर्मी उन्हें जलाकर राख कर देती है। यह हाल में ज्ञात हुआ, लेकिन इसकी खोज से 1400 वर्ष पहले क़ुरआन में इसे चित्रित किया गया था।
03क़ुरआन का अंश · क़ुरआन 52:44
وَإِنْ يَرَوْا كِسْفًا مِنَ السَّمَاءِ سَاقِطًا يَقُولُوا سَحَابٌ مَرْكُومٌ ٤٤
यदि वे आकाश के टुकड़े गिरते हुए देखें, तो कहेंगे, “यह तो तह-ब-तह बादल हैं।”
04चिंतन
वे उन्हें बादल समझेंगे क्योंकि उनकी राख बादलों जैसी दिखती है।


05 · विचार करें